Categories: नज़्म

बचपन – उफ़ुक़ देहलवी की नज़्म

Published by
Ufuq Dehlvi

थामे हाथ अपने अब्बू का
कमसिन बच्चा भोला-भाला
घर के पास ही बाग़ीचे में
सुब्ह सवेरे सैर को आया
बाग़ीचे में हरियाली थी
ग़ुंचा ग़ुंचा महक रहा था
शाख़ों पर गुल झूम उठते थे
छेड़ता था जब हवा का झोंका
देख के दिलकश मंज़र बच्चा
दिल ही दिल में अपने ख़ुश था
मख़मल जैसी घास पे उस ने
मोतियों को जब बिखरे देखा
अब्बू की फिर छोड़ के उँगली
दौड़ के मोती चुनने पहुँचा
उस के अब्बू ने जब देखा
पूछा क्या करते हो बेटा
कहने लगा वो कमसिन बच्चा
चुनता हूँ मैं मोती अब्बा
मोती चुटकी से वो उठाता
पानी था पानी हो जाता
अब्बू ने मा’सूम अदा पर
गोद में ले कर ख़ूब ही चूमा
और ये फिर बच्चे को बताया
मोती क़तरा है शबनम का
चाहे जितनी कोशिश कर लो
हाथ पे लेकिन आ न सकेगा
काश ‘उफ़ुक़’ मा’सूम बनें हम
बचपन फिर लौट आएगा अपना

786
Published by
Ufuq Dehlvi