Categories: ग़ज़ल

एक नज़र क्या इधर हो गई

Published by
Ganesh Bihari Tarz

एक नज़र क्या इधर हो गई
अजनबी हम से हर नज़र हो गई

ज़िंदगी क्या है और मौत क्या
शब हुई और सहर हो गई

उन की आँखो में अश्क़ आ गए
दास्ताँ अपनी मुख़्तसर हो गई

चार तिनके ही रख पाए थे
और बिजलियो को ख़बर हो गई

छिड़ गई किस के दामन की बात
ख़ुद-ब-ख़ुद आँखे तर हो गई !!

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Ganesh Bihari Tarz