Categories: कविता

रिक्शेवाला – अशोक चक्रधर की कविता

Published by
Dr. Ashok Chakradhar

आवाज़ देकर
रिक्शेवाले को बुलाया
वो कुछ
लंगड़ाता हुआ आया।

मैंने पूछा-
यार, पहले ये तो बताओगे,
पैर में चोट है कैसे चलाओगे?

रिक्शेवाला कहता है-
बाबू जी,
रिक्शा पैर से नहीं
पेट से चलता है।

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Dr. Ashok Chakradhar