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चल दी जी चल दी

मैंने कहा-
चलो
उसने कहा-
ना
मैंने कहा-
तुम्हारे लिए ख़रीदभर बाज़ार है
उसने कहा-
बन्द
मैंने पूछा-
क्यों
उसने कहा-
मन
मैंने कहा-
न लगने की क्या बात है
उसने कहा-
बातें करेंगे यहीं
मैंने कहा-
नहीं, चलो कहीं
झुँझलायी
क्या-आ है?
मैनें कहा-
कुर्ता ख़रीदना है अपने लिए।
चल दी जी, चल दी
वो ख़ुशी-ख़ुशी जल्दी।

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By: Dr. Ashok Chakradhar

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