loader image

एक बरस बीत गया

एक बरस बीत गया

झुलासाता जेठ मास
शरद चाँदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया
एक बरस बीत गया

सीकचों मे सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अम्बर तक
गूंज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन
लौट कभी आएगा
मन का जो मीत गया
एक बरस बीत गया

821

Add Comment

By: Atal Bihari Vajpayee

© 2022 पोथी | सर्वाधिकार सुरक्षित

Do not copy, Please support by sharing!