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सोख न लेना पानी

सूरज!
सोख न लेना पानी!

तड़प तड़प कर मर जाएगी
मन की मीन सयानी!
सूरज, सोख न लेना पानी!

बहती नदिया सारा जीवन
साँसें जल की धारा
जिस पर तैर रहा नावों-सा
अंधियारा उजियारा
बूंद-बूंद में गूँज रही है
कोई प्रेम कहानी!
सूरज, सोख न लेना पानी!

यह दुनिया पनघट की हलचल
पनिहारिन का मेला
नाच रहा है मन पायल का
हर घुंघुरू अलबेला
लहरें बाँच रही हैं
मन की कोई बात पुरानी!
सूरज, सोख न लेना पानी!

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By: Kunwar Bechain

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