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आश्वस्ति – धूमिल की कविता

सात रंग
होंठों पर तौल कर
विधवा गर्भिणी ने कहा —
‘डेढ़ किलोग्राम है’
लेकिन मैं
सौदे की दुनिया से बाहर था
पूछा नहीं —
उसका क्या नाम है?
हाँ…आँ…लो
यह पूरा दाम है।

आश्वस्ति

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By: Sudama Pandya 'Dhumil'

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