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Akhtar-ul -Iman

अख़्तरुल ईमान (12 नवम्बर 1915 - 9 मार्च 1996) का जन्म किला, नजीबाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ। आधुनिक उर्दू नज़्म के संस्थापकों में शामिल, अख़्तर-उल-ईमान का काफ़ी प्रभाव रहा है। फ़िल्म 'वक़्त' में अपने संवाद "जिनके घर शीशे के हों - वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते" से बेशुमार शुहरत मिली।
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