सब गुरुजन को बुरो बतावै By: Bhartendu Harishchandra कविता सब गुरुजन को बुरो बतावै । अपनी खिचड़ी अलग पकावै । भीतर तत्व न झूठी तेजी । क्यों सखि सज्जन नहिं अँगरेजी । 5 FacebookXPinterestWhatsApp