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मैंने घुटने से कहा

मैंने उसकी वरज़िश करते हुए कहा – प्यारे घुटने
तुम्हें सत्तर वर्ष चलना था
और तुम अभी स चोट खा गए
जबकि अभी ’70 है। तुम्हें
भाषा के दलिद्दर से उबरना तुम्हें और
सारी कौम का सपना बनना था

कविता में कितना जहर है और कितना देश
अपनी गरीबी की मार का मुँह तोड़ने के लिए
एक शब्द कितना कारगर होता है।
तुम्हें यह सवाल तय करना था।

अपनी भूख और बेकारी और नींद को
साहस की चौकी पर रख दो
और देखो कि दीवार पर उसका
क्या असर होता है।

गुस्से का रंग नीला या जोगिया
गुस्से का रंग बैंगनी या लाल
गुस्से का एक रंग ठीक उस तरह जैसे ख़ुसरो गुस्सा
या गुस्सा कंगाल

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By: Sudama Pandya 'Dhumil'

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