loader image

ज़रा मोहतात होना चाहिए था

ज़रा मोहतात होना चाहिए था
बग़ैर अश्कों के रोना चाहिए था

अब उन को याद कर के रो रहे हैं
बिछड़ते वक़्त रोना चाहिए था

मिरी वादा-ख़िलाफ़ी पर वो चुप है
उसे नाराज़ होना चाहिए था

चला आता यक़ीनन ख़्वाब में वो
हमें कल रात सोना चाहिए था

सुई धागा मोहब्बत ने दिया था
तो कुछ सीना पिरोना चाहिए था

हमारा हाल तुम भी पूछते हो
तुम्हें मालूम होना चाहिए था

वफ़ा मजबूर तुम को कर रही थी
तो फिर मजबूर होना चाहिए था

1

Add Comment

By: Fahmi Badayuni

© 2021 पोथी | सर्वाधिकार सुरक्षित

Do not copy, Please support by sharing!