loader image

वीरांगना – केदारनाथ अग्रवाल की कविता

मैंने उसको
जब-जब देखा
लोहा देखा
लोहे जैसा-
तपते देखा-
गलते देखा-
ढलते देखा
मैंने उसको
गोली जैसा
चलते देखा।

वीरांगना

976

Add Comment

By: Kedarnath Agarwal

© 2022 पोथी | सर्वाधिकार सुरक्षित

Do not copy, Please support by sharing!