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नई मरियम – ख़ुर्शीद-उल-इस्लाम की नज़्म

कैसी तवाना कैसी चंचल कितनी शोख़ और क्या बेबाक
कैसी उमंगें कैसी तरंगें कितनी साफ़ और कैसी पाक
होश की बातें शौक़ की घातें जोश-ए-जवानी सीना-चाक
ख़ंदा ऐसा जैसे रक़्स
बातें ऐसी जैसे साज़
कैसी तवज्जोह कैसी मोहब्बत जिस में शामिल कम कम नाज

नई मरियम

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By: Khurshid-ul Islam

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