loader image

ज़िन्दगी यूँ ही चली

ज़िन्दगी यूँ ही चली यूँ ही चली मीलो तक
चन्दनी चार कदम, धूप चली मीलों तक

प्यार का दाँव अजब दाँव है जिसमे अक्सर
कत्ल होती ही नहीं दुख की गली मीलों तक

घर से निकला तो चली साथ मे बिटिया भी हँसी
खुशबू इन से ही जी रही नन्ही कली

मन के आँचल मे जो सिमटी तो घुमड़ कर बरसी
मेरी पलको पे जो एक पीर पली मीलों तक

569

Add Comment

By: Kunwar Bechain

© 2022 पोथी | सर्वाधिकार सुरक्षित

Do not copy, Please support by sharing!