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सरकार हमर – छगनलाल सोनी की रचना

बेंदरा नाच नाचेथे संगी, अइसन हे सरकार हमर
आस जगाथे असवासन म लबरा हे सरकार हमर

का जिनगी के जीयई ल कहिवे, करलई होगे पेट के आज
सुरसा कस महंगाई बाढ़य घी कस भाव हे तेल के आज
मिंझरा जीनिस के भाव हे दुना, अइसन हाट बजार हमर

छोड़ के भागे खेत खार ल नौकरी खोजय दाऊजी देख
बिपत परे म बैंक के करजा बाढ़ी मांगय खाउजी देख
काठा बोके मुठा लुवत हन, अइसन खेती खार हमर

चाय-पानी के चले चलागन, चारो कोति अउ सबो जगा
ठगे के कतको नौकरी करथे, जा पइसा दे तंहूं ठगा
विकास धरागे गहना अब तो, अइसन भ्रष्टाचार हमर

टरक झंपाये मनखे उपर, रेल बिछलथे पटरी ले
देखव सुते हे सड़क बेवस्था, बस चलय बिन परमिट के
समधी भेंट पर रोज अभरथे, अइसन मोटर कार हमर

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By: Chhagan Lal Soni

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