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अभी तुम हो रास्ते में

अभी तुम हो रास्ते में
अभी तुम हो धाम के उस पार
अभी तुम पवनार में हो
वृद्ध-जर्जर साध्वियों के संग
अभी तुम हो प्रार्थना की व्यर्थता में
अभी तुम बापू कुटी में
अभी तुम शान्ति के स्तूप में
उस गोल घेरे में
अभी तुम हो नाशवान शरीर-मन्दिर में
अभी तुम हो फूल
जिसमें शूल-सा मैं चुभ रहा हूँ

लौट आओ
इसी पथ पर कुचल
दो यह नोक
मेरी। सदा को
सुनसान
मेरा।

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By: Doodhnath Singh

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