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भूल गया सब कुछ

नहाया नहीं अरे, आज अभी तक
अभौतिक-अजीवन-अन-अर्थ,
कुछ भी खाया नहीं अदृश्य
अननुभूत । गुन-गुन खटराग
सुनाया नहीं उसको
जो आया नहीं ।

भूल गया सब कुछ
शब्दों में कुछ भी समाया नहीं ।
अब तो गया -– निष्क्रमित हुआ
रूखा-सूखा यह जीवन
अब तक सरसाया नहीं
बरसे-बरसे वे बादल
वे बादल फिर भी
अघाया नहीं ।

गया । अब गया यह
स्वर्ण-कलश अ-तिथि जीवन
जला
बस जलाया नहीं ।

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By: Doodhnath Singh

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