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पूंजीवादी व्यवस्था – केदारनाथ अग्रवाल की कविता

(पूंजीवादी व्यवस्था के प्रति केदारनाथ जी के उद्गार)

हे मेरी तुम
डंकमार संसार न बदला
प्राणहीन पतझार न बदला
बदला शासन, देश न बदला
राजतंत्र का भेष न बदला,
भाव बोध उन्मेष न बदला,
हाड़-तोड़ भू भार न बदला
कैसे जियें?
यही है मसला
नाचे कौन बजाये तबला?

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By: Kedarnath Agarwal

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