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सादुल्लाह शाह के चुनिंदा शेर

तुम ने कैसा ये राब्ता रक्खा
न मिले हो न फ़ासला रक्खा


मुझ सा कोई जहान में नादान भी न हो
कर के जो इश्क़ कहता है नुक़सान भी न हो


ऐसे लगता है कि कमज़ोर बहुत है तू भी
जीत कर जश्न मनाने की ज़रूरत क्या थी


तू रुके या न रुके फ़ैसला तुझ पर छोड़ा
दिल ने दर खोल दिए हैं तिरी आसानी को


तू न रुस्वा हो इस लिए हम ने
अपनी चाहत पे दायरा रक्खा


अपनी सोचें सफ़र में रहती हैं
उस को पाने की जुस्तुजू देखो


सादुल्लाह शाह के शेर

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By: Saadullah Shah

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